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सहरिया महिला को मिला ”दी हॉल ऑफ फेम पुरस्कार 2011”
लखन सालवी
इस साल का ”दी हॉल ऑफ फेम पुरस्कार” सहरिया आदिवासी क्षेत्र किद्गानगंज के भंवरगढ़ गांव की ग्यारसी बाई सहरिया को मिला है। लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने पर दिए गए इस पुरस्कार को पाने वाली यह पहली सहरिया महिला है। क्षेत्र में सामाजिक बदलाव के कार्य कर रहे जाग्रत महिला संगठन की महिला कार्यकर्ताओं के साथ उसके द्वारा इस वर्ष बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराने के लिए किए गए कार्य पर उसे यह पुरस्कार दिया गया है।
अजीम प्रेमजी फाउण्डेद्गान के सहयोग से सिविल सोसायटी मैगजीन द्वारा देद्गा के 6 राज्यों के 6 लोगों को यह पुरस्कार दिया गया है। जिनमें राजस्थान के बारां जिले की ग्यारसी बाई सहरिया भी शामिल है। दिल्ली में इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेन्टर में 30 नवम्बर को आयोजित हुए सम्मान समारोह में यह पुरस्कार दिया गया। समारोह में मुखय अतिथि राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की सदस्य एवं रैमन मैग्सैसे अवार्ड विजेता श्रीमति अरूणा रॉय ने कहा कि छोटी-छोटी जगहों पर छोटे-छोटे कार्य करते हुए बड़े बदलाव करने वाले लोग मुखयधारा के टीवी चैनल व समाचार पत्रों में दिखाई नहीं देते है। ऐसे लोगों को पटल पर लाने के लिए हमें कई तरह के रास्ते निकालने चाहिए।
उल्लेखनीय है कि ग्यारसी बाई कोई 20 सालों से बारां जिले के सहरिया बाहुल्य क्षेत्र किद्गानगंज व शाहबाद के गांवों में सामाजिक कार्यों में जुटी है। सन् 2002 में बने जाग्रत महिला संगठन से जुड़कर जन मुद्दों पर कार्य कर रही है। उसके द्वारा सिविल सोसायटी के लिए किए गए सराहनीय कार्यों की बदौलत ही उसे आज नई पहचान मिली है। लेकिन वो इस नई पहचान का दंभ नहीं भर रही है, यह उसकी सरलता की निद्गाानी है। वो इस पुरस्कार के बारे में पूछने पर कहती है कि ”बीने कांई केवे बो तो मूं भूलरी छूं, पण आ खबर छे के आच्छो काम करबा काण यो पुरस्कार दियो छे मने।” (उस पुरस्कार को क्या कहते है यह तो मैं भूल रही हूं पर इतना जरूर जानती हूं अच्छा कार्य करने पर यह पुरस्कार दिया गया है मुझे) इस साल का ”दी हॉल ऑफ फेम पुरस्कार” सहरिया आदिवासी क्षेत्र किद्गानगंज के भंवरगढ़ गांव की ग्यारसी बाई सहरिया को मिला है। लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने पर दिए गए इस पुरस्कार को पाने वाली यह पहली सहरिया महिला है। क्षेत्र में सामाजिक बदलाव के कार्य कर रहे जाग्रत महिला संगठन की महिला कार्यकर्ताओं के साथ उसके द्वारा इस वर्ष बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराने के लिए किए गए कार्य पर उसे यह पुरस्कार दिया गया है। ……………………………..Read More




January 6th, 2012


